यमन में हूती विद्रोहियों और सेना की भिड़ंत से क्यों दहल उठा लाल सागर का इलाका

यमन में हूती विद्रोहियों और सेना की भिड़ंत से क्यों दहल उठा लाल सागर का इलाका

यमन की ज़मीन एक बार फिर इंसानी खून से लाल हो चुकी है। क्या आप जानते हैं कि दुनिया के सबसे अहम समुद्री रास्तों में से एक के पास अचानक खूनी संघर्ष क्यों भड़क उठा है? जब सरकारी सेना और हूती विद्रोही आमने-सामने आते हैं, तो तबाही का मंज़र सिर्फ जंग के मैदान तक सीमित नहीं रहता। हाल ही में हुई भीषण झड़पों में 60 से ज़्यादा लोगों की जान चली गई।

यह सिर्फ एक स्थानीय संघर्ष नहीं है। इसके तार वैश्विक व्यापार और मध्य पूर्व की बदलती भू-राजनीति से जुड़े हैं। आइए समझते हैं कि यमन में इस नई हिंसा की असली वजह क्या है और क्यों यह पूरी दुनिया के लिए चिंता का विषय बन चुका है।

बाब अल-मंदेब स्ट्रेट पर कब्जे की खतरनाक जंग

लाल सागर का यह इलाका दुनिया के सबसे व्यस्त व्यापारिक मार्गों में गिना जाता है। यमन में सेना और हूतियों के बीच छिड़ी इस ताज़ा जंग के केंद्र में यही रणनीतिक जलमार्ग है। हूती विद्रोही मोका बंदरगाह को अलग-थलग करना चाहते हैं। वे बाब अल-मंदेब स्ट्रेट के पास अपनी पकड़ मज़बूत करने की कोशिश में हैं।

जब दो पक्षों के बीच नियंत्रण की ऐसी जिद्द हो, तो नुकसान हमेशा आम इंसानों को उठाना पड़ता है। हालिया झड़पें देश के दक्षिण-पश्चिमी हिस्से में हुईं, जहाँ पिछले कई दिनों से हालात लगातार बिगड़ रहे हैं।

जब मौत दोनों तरफ से बरसी

ताज़ा आंकड़ों के अनुसार, इस खूनी संघर्ष में भारी जानी नुकसान हुआ है।

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  • एक दिन की लड़ाई में 26 से ज़्यादा सैनिक मारे गए।
  • हूती पक्ष के चिकित्सा और सैन्य सूत्रों ने भी अपने 31 लड़ाकों के मारे जाने की पुष्टि की।
  • ताइज शहर की ओर जाने वाली एक बस पर मिसाइल हमला हुआ, जिसमें 6 मासूम नागरिकों की जान चली गई और 7 अन्य बुरी तरह घायल हो गए।

यह बस ताइज से अदन जा रही थी। अदन वही शहर है जहाँ अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त यमनी सरकार अपना कामकाज संभालती है। जब आम नागरिकों को निशाना बनाया जाने लगे, तो समझ लीजिए कि युद्ध अब अपनी सबसे क्रूर हद पार कर चुका है।

साल 2022 के समझौते के टूटने के बाद बिगड़े हालात

आपको शायद याद हो कि कुछ साल पहले एक युद्धविराम समझौता हुआ था। लेकिन जुलाई में उस समझौते के टूटने के बाद से यमन की शांति हवा हो गई। पिछले कुछ हफ्तों में हिंसा इस स्तर पर पहुँच चुकी है कि लोग इसे पिछले कई वर्षों के सबसे घातक दौर में से एक मान रहे हैं। शुक्रवार को हुई लड़ाई में तो लगभग 129 लोगों की जान चली गई थी।

सैन्य अधिकारियों के मुताबिक, आने वाले घंटे बेहद निर्णायक होने वाले हैं। हूती विद्रोही शहर के पास कई अहम ठिकानों पर कब्जा जमा चुके हैं। इसके जवाब में अदन से सरकारी सैनिकों के भारी सुदृढीकरण लगातार भेजे जा रहे हैं।

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यमन का एक दशक लंबा दर्दनाक सफर

यमन पिछले एक दशक से अधिक समय से भीषण गृहयुद्ध की आग में जल रहा है। राजनीतिक अस्थिरता, बाहरी दखलअंदाजी और भुखमरी ने इस देश को तबाह कर दिया है। जब तक रणनीतिक बंदरगाहों और तेल क्षेत्रों पर कब्जे की यह सियासत चलती रहेगी, तब तक आम यमनी नागरिकों का जीवन नारकीय बना रहेगा।

अब देखना यह होगा कि क्या अंतरराष्ट्रीय समुदाय इस नए संघर्ष को रोकने के लिए कोई ठोस कदम उठा पाता है या लाल सागर का यह किनारा आने वाले दिनों में और भी बड़ी तबाही का गवाह बनेगा। हालात तेजी से बदल रहे हैं और अगली सुबह कौन सी खबर लेकर आएगी, कोई नहीं जानता।

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Chloe Price

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