होर्मुज की जंग अब सिर्फ अमेरिका और ईरान के बीच नहीं रही

होर्मुज की जंग अब सिर्फ अमेरिका और ईरान के बीच नहीं रही

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) में अचानक मिसाइलें बरसने लगी हैं और इस बार निशाना कोई सैन्य अड्डा नहीं, बल्कि सीधे तौर पर तेल के टैंकर बने हैं। संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के दो बड़े तेल टैंकरों पर हुए ईरानी मिसाइल हमलों ने पूरी दुनिया को हिलाकर रख दिया है। यह सिर्फ दो जहाजों पर हुआ हमला नहीं है। यह दुनिया के सबसे संवेदनशील समुद्री व्यापारिक रास्ते को ठप करने की एक सीधी और बेहद खतरनाक कोशिश है। इस हमले के बाद यूएई और ईरान के बीच का तनाव उस खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है जहां से सीधे युद्ध की आशंका दिखने लगी है।

जब बीच समंदर में लगी आग

यह घटना ओमान के प्रादेशिक जलक्षेत्र में दक्षिणी नौवहन मार्ग में हुई। यूएई के दो विशालकाय तेल टैंकर, मोम्बासा (Mombasa) और अल बहिया (Al Bahiyah), अपनी नियमित यात्रा पर थे। तभी ईरान की ओर से दागी गईं क्रूज मिसाइलों ने दोनों जहाजों को निशाना बनाया। मिसाइलें टकराते ही जहाजों पर भयानक आग लग गई। चालक दल के सदस्यों ने बड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया, वरना एक बहुत बड़ा विनाशकारी हादसा हो सकता था। If you liked this article, you should check out: this related article.

इस हमले में एक भारतीय नाविक की मौत हो गई, जबकि आठ अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए। घायलों में छह भारतीय और दो यूक्रेनी नागरिक शामिल हैं। भारत के लिए यह बेहद गंभीर और दुखद खबर है। भारतीय विदेश मंत्रालय ने तुरंत एक्शन लेते हुए नई दिल्ली में ईरान के उप-राजदूत मोहम्मद जवाद हुसैनी को तलब किया और इस कायरतापूर्ण हमले पर अपना कड़ा विरोध दर्ज कराया है।

यूएई का पारा चढ़ गया है

यूएई के रक्षा मंत्रालय ने इस घटना की तीखे शब्दों में निंदा की है। इसे अंतरराष्ट्रीय कानून का खुला उल्लंघन करार दिया गया है। यूएई ने बहुत ही साफ लहजे में कह दिया है कि वह अपने नागरिकों, अपनी संप्रभुता और अपने हितों की रक्षा के लिए हर जरूरी कदम उठाने के लिए पूरी तरह तैयार है। यूएई के आधिकारिक बयान के अनुसार, देश अपनी शांति और स्थिरता को बिगाड़ने वाले किसी भी प्रयास का कड़ा और माकूल जवाब देने का पूरा अधिकार सुरक्षित रखता है। For another perspective on this development, refer to the recent coverage from Associated Press.

दरअसल, यूएई की सेना और सुरक्षा एजेंसियां इस वक्त हाई अलर्ट पर हैं। यूएई की सरकार ने आम जनता से अपील की है कि वे सोशल मीडिया पर चल रही अफवाहों से दूर रहें और सिर्फ आधिकारिक जानकारियों पर ही भरोसा करें।

ईरान ने इस हमले को लेकर अपनी सफाई भी पेश की है। ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) का दावा है कि इन टैंकरों को बार-बार चेतावनी दी जा रही थी। ईरान के मुताबिक, इन जहाजों ने समुद्री सुरक्षा के नियमों को ताक पर रखकर अपने नेविगेशन सिस्टम बंद कर दिए थे और एक प्रतिबंधित रास्ते से निकलने की कोशिश कर रहे थे। खैर, इस तरह की सफाई ईरान अक्सर अपनी हर आक्रामक कार्रवाई के बाद देता आया है, लेकिन सच तो यही है कि इस बार उसने सीधे तौर पर यूएई के संप्रभु अधिकारों को चुनौती दी है।

भारत की बढ़ती चिंताएं और वैश्विक असर

भारत के लिए यह संकट कई गुना बड़ा है। पहला तो यह कि हमारे एक जांबाज नाविक ने इस संघर्ष में अपनी जान गंवा दी है। पिछले कुछ महीनों में पश्चिम एशिया में जारी इस तनाव के कारण जान गंवाने वाले भारतीय नागरिकों की संख्या अब बढ़कर 11 हो गई है। पिछले महीने ही अमेरिकी हमले में तीन भारतीय नाविकों की मौत हुई थी। भारत लगातार इस क्षेत्र में काम करने वाले अपने नागरिकों की सुरक्षा को लेकर चिंतित है।

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दूसरी बड़ी चिंता है देश की ऊर्जा सुरक्षा और अर्थव्यवस्था। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज वह रास्ता है जहां से दुनिया का करीब 20 प्रतिशत कच्चा तेल गुजरता है। अगर यह समुद्री रास्ता असुरक्षित हो जाता है, तो तेल की कीमतों में बेतहाशा बढ़ोतरी होना तय है। जानकारों का मानना है कि होर्मुज संकट के चलते भारत के लिए कच्चे तेल की कीमत में प्रति बैरल 2 से 3 डॉलर तक की बढ़ोतरी हो सकती है, जो हमारी अर्थव्यवस्था के लिए एक बड़ा झटका होगी। ब्रेंट क्रूड पहले ही 84 डॉलर प्रति बैरल के स्तर को छूने लगा है।

क्या अब खाड़ी देश सीधे युद्ध में उतरेंगे

काफी समय से यह माना जा रहा था कि खाड़ी के देश इस जंग में सीधे शामिल होने से बचेंगे। वे अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे इस गतिरोध में खुद को तटस्थ रखने की कोशिश कर रहे थे। हालांकि, सीधे यूएई के जहाजों पर मिसाइल दागकर ईरान ने इस तटस्थता को खत्म करने पर मजबूर कर दिया है। अब यह सिर्फ अमेरिका बनाम ईरान की लड़ाई नहीं रही। बहरीन और सऊदी अरब जैसे देशों ने भी यूएई पर हुए इस हमले की कड़ी आलोचना की है।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ईरान के बंदरगाहों की पूर्ण नाकेबंदी की घोषणा कर दी है। अमेरिकी सेना लगातार ईरानी ठिकानों और मिसाइल अड्डों को निशाना बना रही है। इसके जवाब में ईरान ने बहरीन, कुवैत और ओमान जैसी जगहों पर अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाने की बात कही है। इस बीच यूएई का यह सख्त रुख दिखाता है कि पानी अब सिर से ऊपर निकल चुका है।

जंग की सुगबुगाहट तेज हो चुकी है। अब देखने वाली बात यह होगी कि यूएई अपने "जवाब देने के अधिकार" का इस्तेमाल कब और किस तरह करता है। क्या कूटनीति के जरिए इस बार भी कोई रास्ता निकलेगा या फिर पूरा खाड़ी क्षेत्र एक बहुत बड़ी तबाही के मुहाने पर जाकर खड़ा हो जाएगा?

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इस पूरे संकट से बचने और अपने हितों की रक्षा के लिए अब भारत को अपनी समुद्री सुरक्षा रणनीति को और तेज करना होगा। खाड़ी देशों के साथ मिलकर भारतीय नौसेना को अपने व्यापारिक जहाजों की सुरक्षा के लिए एस्कॉर्ट मिशन को बढ़ाना होगा।

EC

Ella Campbell

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